पौधों को स्वस्थ रहने के लिए सिर्फ़ सूरज की रोशनी, पानी और तीन मुख्य पोषक तत्वों—नाइट्रोजन, फ़ॉस्फ़ोरस और पोटैशियम—की ही ज़रूरत नहीं होती। उन्हें आयरन, ज़िंक, मैंगनीज़, बोरॉन, कॉपर, मोलिब्डेनम, क्लोरीन और निकेल जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों (माइक्रोन्यूट्रिएंट्स) की भी थोड़ी मात्रा में ज़रूरत होती है।
हालांकि पौधों को इन पोषक तत्वों की कम मात्रा में ज़रूरत होती है, लेकिन इनकी कमी से उनकी बढ़त, पत्तियों के रंग, फूल आने, फल लगने और कुल मिलाकर सेहत पर असर पड़ सकता है। अच्छी बात यह है कि माली कम्पोस्ट, ऑर्गेनिक मैटर और सही तरह से चुने गए प्लांट फ़र्टिलाइज़र का इस्तेमाल करके इन सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता को बेहतर बना सकते हैं।
पौधों के लिए माइक्रोन्यूट्रिएंट्स क्या हैं?
माइक्रोन्यूट्रिएंट्स (सूक्ष्म पोषक तत्व) वे ज़रूरी तत्व हैं जिनकी पौधों को बहुत कम मात्रा में ज़रूरत होती है। ये मैक्रोन्यूट्रिएंट्स (मुख्य पोषक तत्वों) से इस मामले में अलग हैं कि इनकी ज़रूरत बहुत कम होती है; फिर भी, पौधों की नॉर्मल ग्रोथ और डेवलपमेंट के लिए ये बहुत ज़रूरी हैं।
- आयरन (Fe): यह क्लोरोफिल बनाने और प्रकाश संश्लेषण (photosynthesis) के लिए ज़रूरी है।
- जिंक (Zn): यह एंजाइम की गतिविधि, वृद्धि और हार्मोन बनाने में मदद करता है।
- मैंगनीज (Mn): ये प्रकाश संश्लेषण और कई एंजाइम वाली प्रक्रियाओं में मदद करता है।
- बोरोन (B): इससे कोशिका भित्ति (cell walls), पोधो के विकसित हिस्सों और प्रजनन विकास के लिए बहुत ज़रूरी होता है।
- कॉपर (Cu): कॉपर एंजाइम के काम करने और प्रजनन संबंधी वृद्धि में मदद करता है।
- मोलिब्डेनम (Mo): पौधों को नाइट्रोजन का सही तरीके से इस्तेमाल करने में मदद करता है।
- क्लोरीन (Cl): प्रकाश संश्लेषण और पानी के संतुलन में शामिल।
- निकेल (Ni): नाइट्रोजन मेटाबॉलिज्म में शामिल कुछ खास एंजाइम के लिए ज़रूरी।
चूंकि इन पोषक तत्वों की ज़रूरत बहुत कम मात्रा में होती है, इसलिए इनकी ज़्यादा मात्रा फायदेमंद नहीं होती; माइक्रोन्यूट्रिएंट्स का ज़्यादा स्तर ज़हरीला हो सकता है और पौधे को नुकसान पहुंचा सकता है।
माइक्रोन्यूट्रिएंट्स क्यों ज़रूरी हैं?
भले ही किसी पौधे में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटैशियम भरपूर मात्रा में हों, लेकिन अगर उसमें एक या उससे ज़्यादा माइक्रोन्यूट्रिएंट्स (सूक्ष्म पोषक तत्वों) की कमी हो, तो वह ठीक से नहीं बढ़ेगा।
उदाहरण के लिए आयरन की कमी से नई पत्तियां पीली पड़ सकती हैं, जबकि उनकी नसें साफ तौर पर हरी बनी रहती हैं। जिंक की कमी से पौधे की ग्रोथ रुक सकती है और पत्तियां छोटी हो सकती हैं। वहीं बोरॉन की कमी नई ग्रोथ और रिप्रोडक्टिव डेवलपमेंट पर असर डाल सकती है।
हालाँकि इन कमियों के लक्षण एक जैसे दिख सकते हैं। उदाहरण के लिए पोषक तत्वों की कमी, खराब जल निकासी, जड़ों को नुकसान, कीटों, बीमारी या मिट्टी के गलत pH लेवल के कारण पत्तियां पीली पड़ सकती हैं।
इसलिए कंसंट्रेटेड माइक्रोन्यूट्रिएंट प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने से पहले असली समस्या का पता लगाना सबसे अच्छा होता है।
ऑर्गेनिक माइक्रोन्यूट्रिएंट्स कैसे बनाएं
पौधों को ऑर्गेनिक तरीके से माइक्रोन्यूट्रिएंट्स देने का सबसे आसान तरीका है कि आप अपनी रसोई में कंसंट्रेटेड फर्टिलाइज़र बनाने की कोशिश करने के बजाय अच्छी क्वालिटी की मिट्टी बनाने पर ध्यान दें। यह उन शुरुआती लोगों के लिए ज़रूरी जानकारी है जो अपने पौधों के लिए ऑर्गेनिक सोर्स और घर पर बने माइक्रोन्यूट्रिएंट्स के बारे में जानना चाहते हैं।
मैच्योर कम्पोस्ट का इस्तेमाल करें
अच्छी तरह से बनी कम्पोस्ट खाद कई तरह के न्यूट्रिएंट्स के सबसे उपयोगी घरेलू सोर्स में से एक है। कम्पोस्ट खाद इन चीज़ों को डीकंपोज़ करके बनाई जाती है
- सब्ज़ियों और फलों के टुकड़े
- पोधो की पत्तियां
- घास की कतरनें
- बिना ट्रीट किए पौधों के बचे हुए हिस्से
- दूसरी सही कम्पोस्टेबल ऑर्गेनिक चीज़ें
सही विधि से तैयार कम्पोस्ट को बगीचे की मिट्टी में मिलाएं या पौधों की क्यारियां और कंटेनर तैयार करते समय सही मात्रा में इस्तेमाल करें। कम्पोस्ट से माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की पूरी मात्रा तो नहीं मिलती लेकिन यह मिट्टी की पूरी सेहत को बनाए रखते हुए न्यूट्रिएंट्स और ऑर्गेनिक चीज़ें दे सकता है।
कम्पोस्ट का इस्तेमाल कैसे करें
मिट्टी में कम्पोस्ट का प्रयोग पौधे लगाने से पहले करना चाहिए या जमे हुए पौधों के चारों ओर एक पतली परत विधि से करें। इसे सीधे तनों के पास न डालें।
कम्पोस्ट टी ध्यान से बनाएं
पूरी तरह से तैयार कम्पोस्ट को पानी में भिगोकर और फिर ठोस हिस्से से तरल को अलग करके कम्पोस्ट-बेस्ड लिक्विड मैच्योर खाद बनाई जा सकती है।
हालांकि, घर पर बनी कम्पोस्ट टी में पोषक तत्वों और माइक्रोबायोलॉजिकल बनावट के मामले में काफी अंतर हो सकता है। इसे सही मात्रा में मापे गए माइक्रोन्यूट्रिएंट फर्टिलाइज़र (सूक्ष्म पोषक तत्व वाली खाद) के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
जिन पोषक तत्वों की खास कमियों को दूर करने के लिए, आमतौर पर टेस्ट किया हुआ फर्टिलाइज़र ही बेहतर विकल्प होता है।
पौधों के अवशेष मिट्टी में वापस डालें
मिट्टी में मौजूद पौधों के अवशेष—जैसे पत्तियां, अन्य जैविक पदार्थ और घास के कटे हुए टुकड़े—सड़-गलकर मिट्टी के पोषक तत्वों की भरपाई करते हैं। इसलिए, बगीचे से गिरी हुई हर पत्ती को हटाने के बजाय, माली पौधों के कचरे का इस्तेमाल मल्च के तौर पर कर सकते हैं या उसे कम्पोस्ट के ढेर में डाल सकते हैं। यह मौजूदा कमियों को तुरंत ठीक करने के बजाय, धीरे-धीरे और लंबे समय में असर दिखाने वाला तरीका है।
वर्म कम्पोस्ट या वर्मी कम्पोस्ट का इस्तेमाल करें
केंचुओं की मदद से बनाया गया वर्मी कम्पोस्ट मिट्टी में सुधार करने का एक और उपयोगी ऑर्गेनिक तरीका है। यह मिट्टी की बनावट को बेहतर बना सकता है और पोषक तत्व और ऑर्गेनिक चीज़ें की आपूर्ति कर सकता है। सही विधि से तैयार किया हुआ वर्मी कम्पोस्ट को बगीचे की क्यारियों में डालें या सही मात्रा में पॉटिंग मीडिया में मिलाएं।
आम कम्पोस्ट की तरह इसमें माइक्रोन्यूट्रिएंट की सही मात्रा इसे बनाने में इस्तेमाल होने वाले मटीरियल पर निर्भर करती है।
घर पर पौधों के लिए माइक्रोन्यूट्रिएंट कैसे बनाएं
अगर आप गाढ़ा माइक्रोन्यूट्रिएंट फर्टिलाइज़र बनाना चाहते है तो सावधानी बरतना ज़रूरी है। पोधो व फसल को बोरॉन, कॉपर, आयरन, मैंगनीज और जिंक जैसे अलग-अलग माइक्रोन्यूट्रिएंट बहुत कम मात्रा में उपयोगी हो सकते हैं। लेकिन ज़्यादा मात्रा में डालने पर नुकसानदायक हो सकते हैं। इसलिए मात्रा का अंदाज़ा लगाकर बनाया गया घर का बना मिक्सचर खाद समस्याओं को हल करने के बजाय और बढ़ा सकता है। अंदरूनी हिस्सों में गाढ़े मिनरल सॉल्ट मिलाने के बजाय पोषक तत्वों से भरपूर ऑर्गेनिक मिट्टी में बदलाव करना एक सुरक्षित तरीका है।
अगर किसी खास माइक्रोन्यूट्रिएंट की कमी की पुष्टि हो गई है तो ऐसा फर्टिलाइज़र इस्तेमाल करें जिसके लेबल पर पोषक तत्व और इस्तेमाल की दर लिखी हो।
क्या किचन का कचरा माइक्रोन्यूट्रिएंट दे सकता है?
हाँ, किचन और बगीचे का कचरा को ठीक से कम्पोस्ट किया जाए तो वह आखिरकार मिट्टी में मिनरल दे सकता है
फल और सब्ज़ियों के बचे हुए टुकड़े पत्ते और दूसरी सही ऑर्गेनिक चीज़ों में अलग-अलग पोषक तत्व होते हैं। इनके सड़ने के दौरान इनमें से कुछ पोषक तत्व कम्पोस्ट का हिस्सा बन जाते हैं।
हालांकि किचन के ताज़े बचे हुए टुकड़ों को सीधे पौधों के आसपास डालना एक बैलेंस्ड माइक्रोन्यूट्रिएंट फर्टिलाइज़र बनाने जैसा नहीं है। ताज़ा ऑर्गेनिक कचरा कीड़ों को आकर्षित कर सकता है, यह बदबूदार हो सकता है, और अचानक सड़ सकता है।
घर पर बने पौधों के माइक्रोन्यूट्रिएंट: केले के छिलके, अंडे के छिलके और कॉफी ग्राउंड के बारे में
क्या कई घरेलू चीज़ें बागवानों के बीच पॉपुलर हैं लेकिन उन्हें पूरा माइक्रोन्यूट्रिएंट फर्टिलाइज़र नहीं माना जाना चाहिए।
- केले के छिलके
केले के छिलकों में मिनरल होते हैं खासकर पोटैशियम और उनसे कम्पोस्ट बनाया जा सकता है। इन्हें पूरे माइक्रोन्यूट्रिएंट सॉल्यूशन के बजाय कम्पोस्ट इंग्रीडिएंट के तौर पर देखना बेहतर है।
- अंडे के छिलके
अंडे के छिलके मुख्य रूप से कैल्शियम कार्बोनेट का सोर्स होते हैं। ये धीरे-धीरे टूटते हैं। खासकर जब बड़े टुकड़ों में इस्तेमाल किए जाते हैं। इसलिए ये ज़्यादातर न्यूट्रिएंट्स की कमी का तुरंत सॉल्यूशन नहीं हैं।
- कॉफ़ी ग्राउंड
कॉफ़ी ग्राउंड का इस्तेमाल करने से यह ऑर्गेनिक मैटर और कुछ न्यूट्रिएंट्स दे सकते हैं। लेकिन ये बैलेंस्ड माइक्रोन्यूट्रिएंट फर्टिलाइज़र नहीं हैं। इसे ज़्यादा मात्रा में सीधे मिट्टी में मिलाने की सलाह नहीं दी जाती है।
- लकड़ी की राख
लकड़ी की राख में कैल्शियम और दूसरे मिनरल्स हो सकते हैं और ये मिट्टी का pH बढ़ा सकते हैं। क्योंकि ज़्यादा इस्तेमाल से मिट्टी बहुत ज़्यादा एल्कलाइन हो सकती है और न्यूट्रिएंट्स की कमी की समस्या हो सकती है। इसलिए इसका इस्तेमाल तभी करना चाहिए जब यह मिट्टी और पौधों के लिए सही हो।
पौधों के लिए माइक्रोन्यूट्रिएंट्स का इस्तेमाल कैसे करें
माइक्रोन्यूट्रिएंट्स डालने से पहले यह सोच लें कि क्या आपके पौधों को सच में उनकी ज़रूरत है।
- पौधों की प्रॉब्लम को पहचानें
- पत्तियों का पीला पड़ना या पीला पड़ना और ग्रोथ रुक जाना।
- नई पत्तियों का टेढ़ा-मेढ़ा होना।
- फूलों या फलों का ठीक से न आना।
- अजीब तरह से रंग बदलना।
- नई ग्रोथ का कमज़ोर होना।
ये लक्षण माइक्रोन्यूट्रिएंट की कमी का सबूत नहीं हैं। लेकिन लक्षणों की तुलना भरोसेमंद बागवानी से जुड़ी जानकारी से करें और मिट्टी की कंडीशन पर ध्यान दें।
- मिट्टी की कंडीशन जांचें
मिट्टी का pH न्यूट्रिएंट की उपलब्धता पर बहुत ज़्यादा असर डालता है। कोई न्यूट्रिएंट मिट्टी में मौजूद हो सकता है लेकिन पौधे को सही pH या मिट्टी की दूसरी कंडीशन की वजह से नहीं मिल पाता।
सिर्फ़ पत्ती के रंग से अंदाज़ा लगाने के बजाय मिट्टी की टेस्टिंग ज़्यादा बेहतर जानकारी दे सकता है।
- सही न्यूट्रिएंट चुनें
सिर्फ़ इसलिए कि पौधा अनहेल्दी लग रहा है मृदा में माइक्रोन्यूट्रिएंट का पूरा मिक्सचर न डालें। अगर इसकी कमी कन्फर्म हो जाती है तो ज़रूरी न्यूट्रिएंट वाला फर्टिलाइज़र चुनें और बनाने वाली कंपनी के इंस्ट्रक्शन को फॉलो करें।
- सही मात्रा में डालें
माइक्रोन्यूट्रिएंट की ज़रूरत बहुत कम मात्रा में होती है। हमेशा प्रोडक्ट लेबल या किसी क्वालिफाइड बागवानी प्रोफेशनल की सलाह मानें। यह आम गलती न करें कि डोज़ दोगुनी करने से पौधे तेज़ी से बढ़ेंगे।
- पौधे पर नज़र रखें
कमी ठीक करने के बाद नई ग्रोथ और पौधे की पूरी हेल्थ पर नज़र रखें। अगर इस बात का कोई सबूत नहीं है कि पौधे को किसी न्यूट्रिएंट की ज़रूरत है तो उसे बार-बार डालने से बचें।
पत्तियों पर डालना बनाम मिट्टी में डालना
सूक्ष्म पोषक तत्व कभी-कभी मिट्टी में या पौधों की पत्तियों पर स्प्रे के तौर पर डाले जा सकते हैं। इन्हे मिट्टी में डालने से ये जड़ों के ज़रिए पोधो को मिलते हैं और यह अक्सर तब काम आता है जब मिट्टी में कमी या न्यूट्रिएंट्स की कमी की समस्या का पता चलता है।
पत्तियों पर डालने से न्यूट्रिएंट्स सीधे पत्तियों पर पड़ते हैं। यह कभी-कभी कुछ कमियों को ज़्यादा तेज़ी से ठीक कर सकता है। लेकिन कॉन्संट्रेशन खास तौर पर ज़रूरी है क्योंकि ज़्यादा पत्तियों पर डालने वाला फर्टिलाइज़र पत्तियों को जला सकता है।
घर पर बने खाद का पत्तियों पर डालने वाले स्प्रे के लिए कॉन्संट्रेटेड मिनरल सॉल्ट्स के साथ एक्सपेरिमेंट करने से बचें जब तक कि आपके पास खास प्रोडक्ट और फसल के लिए भरोसेमंद इंस्ट्रक्शन न हों।
गमले वाले पौधों के लिए ऑर्गेनिक माइक्रोन्यूट्रिएंट्स कैसे बनाएं
जो पौधे घर, ऑफिस आदि (कंटेनर वाले पौधों) में लगाए जाते है उनमे मिट्टी कम होती है इसलिए न्यूट्रिएंट्स की समस्याएँ बगीचे की क्यारियों की तुलना में अलग तरह से हो सकती हैं। शुरुआती लोगों के लिए एक प्रैक्टिकल तरीका यह है कि
- अच्छी क्वालिटी का पॉटिंग मिक्स का इस्तेमाल करें।
- जहां सही हो मैच्योर कम्पोस्ट या वर्मीकम्पोस्ट का इस्तेमाल करें।
- ज़रूरत पड़ने पर बैलेंस्ड फर्टिलाइज़र का इस्तेमाल करें।
- अगर कमी पता चले तो सूक्ष्म पोषक तत्व का इस्तेमाल करें।
- माइक्रोन्यूट्रिएंट्स वाला फर्टिलाइज़र का इस्तेमाल करें।
सिर्फ इसलिए पॉट में घर की बनी चीज़ें न डालें क्योंकि वे "नेचुरल" हैं। नेचुरल चीज़ों में भी ज़्यादा न्यूट्रिएंट्स हो सकते हैं या मिट्टी का pH बदल सकता है।
ये लक्षण सिर्फ़ संकेत हैं। की सिर्फ़ देखकर किसी पोषक तत्व की कमी का पक्का पता नहीं लगाया जा सकता।घर पर बनाते समय होने वाली आम गलतियाँ
इनका बहुत ज़्यादा इस्तेमाल करना
किसान और बागवान की सबसे बड़ी गलती सूक्ष्म पोषक तत्व का ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल करना है। पौधों को माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की बहुत कम मात्रा की ज़रूरत होती है और इसे ज़्यादा मात्रा में डालने से मृदा ज़हरीली हो सकती है।
अलग-अलग चीज़ों को मिलाना
घर की कई चीज़ों को मिलाने से अपने-आप संतुलित खाद नहीं बन जाती। आखिर में पोषक तत्वों की मात्रा और केमिकल गुण क्या होंगे यह पता नहीं चल पाता।
मिट्टी के pH को नज़रअंदाज़ करना
भले ही मिट्टी में कोई पोषक तत्व मौजूद हो लेकिन कुछ खास pH स्थितियों में पौधा उसे ठीक से सोख नहीं पाता।
हर पीली पत्ती को आयरन की कमी समझना
फसल में पीलापन कई वजहों से हो सकता है जैसे प्राकृतिक रूप से पुराना होना, पानी देने में दिक्कत, जड़ों पर दबाव, कीड़े, बीमारी और पोषक तत्वों की कमी होना आदि।
यह मान लेना कि ऑर्गेनिक का मतलब बिना जोखिम के है
खेती में ऑर्गेनिक खाद और मिट्टी सुधारने वाली चीज़ें फायदेमंद हो सकती हैं लेकिन "ऑर्गेनिक" का मतलब यह नहीं है कि उनकी कितनी भी मात्रा इस्तेमाल करना सुरक्षित है।
क्या घर पर बना माइक्रोन्यूट्रिएंट फर्टिलाइज़र कमर्शियल फर्टिलाइज़र से बेहतर है?
ज़रूरी नहीं। घर पर बनी ऑर्गेनिक खाद मिट्टी की सेहत सुधारने और पोषक तत्वों को रीसायकल करने के लिए बहुत अच्छी होती है। ये लंबे समय तक बागवानी करने के तरीके में खास तौर पर उपयोगी होती हैं।कमर्शियल माइक्रोन्यूट्रिएंट फर्टिलाइज़र का एक बड़ा फायदा तब होता है जब किसी खास कमी को ठीक करना हो। उनके लेबल पर पोषक तत्वों की मात्रा लिखी होती है और उन्हें सही मात्रा में इस्तेमाल किया जा सकता है।
शुरुआत करने वालों के लिए मिट्टी को बेहतर बनाने के लिए घर पर बनी खाद और दूसरी ऑर्गेनिक चीज़ों का इस्तेमाल करना चाहिए। जबकि पक्की कमी होने पर सही मात्रा में पोषक तत्व देने के लिए सही तरीके से बने फर्टिलाइज़र का इस्तेमाल करना चाहिए।
मैं घर पर पौधों के लिए माइक्रोन्यूट्रिएंट्स कैसे बना सकता हूँ?
शुरुआत करने वालों के लिए सबसे सुरक्षित तरीका है पोषक तत्वों से भरपूर खाद बनाना या मिट्टी में सुधार के लिए तैयार वर्मीकम्पोस्ट का इस्तेमाल करना। कंसंट्रेटेड माइक्रोन्यूट्रिएंट्स के लिए मिनरल साल्ट की मात्रा का अंदाज़ा लगाने के बजाय सही तरीके से बने फर्टिलाइज़र का इस्तेमाल करें।
पौधों के लिए सबसे अच्छे ऑर्गेनिक माइक्रोन्यूट्रिएंट्स कौन से हैं?
पोधो के लिए ऑर्गेनिक मैटर, तैयार खाद, वर्मीकम्पोस्ट और सही तरीके से सड़े-गले पौधों के अवशेष कई तरह के माइक्रोन्यूट्रिएंट्स दे सकते हैं। उनमें पोषक तत्वों की मात्रा अलग-अलग होती है इसलिए उन्हें टेस्ट किए गए माइक्रोन्यूट्रिएंट फर्टिलाइज़र का सटीक विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
क्या मैं किचन के कचरे से लिक्विड माइक्रोन्यूट्रिएंट्स बना सकता हूँ?
किचन के कचरे से खाद बनाकर पोषक तत्वों से भरपूर ऑर्गेनिक मैटर तैयार किया जा सकता है। लेकिन घर पर बने लिक्विड एक्सट्रैक्ट में माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की मात्रा का पक्का अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता। आमतौर पर कम्पोस्टिंग घर की बागवानी के लिए ज़्यादा भरोसेमंद तरीका है।
पौधों पर माइक्रोन्यूट्रिएंट्स का इस्तेमाल कितनी बार करना चाहिए?
इसके लिए कोई एक तय शेड्यूल नहीं है। सही अंतराल इस बात पर निर्भर करता है कि पौधा कौन सा है। मिट्टी कैसी है, न्यूट्रिएंट कौन सा है, फर्टिलाइज़र की सांद्रता (concentration) क्या है और क्या सच में किसी न्यूट्रिएंट की कमी है। फर्टिलाइज़र के लेबल या मिट्टी की जांच की सलाह का पालन करें।
क्या बहुत ज़्यादा माइक्रोन्यूट्रिएंट्स पौधों को नुकसान पहुंचा सकते हैं?
हां। पौधों को माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की ज़रूरत कम मात्रा में होती है और बहुत ज़्यादा मात्रा से टॉक्सिसिटी (ज़हरीलापन) हो सकती है या दूसरे न्यूट्रिएंट्स के अवशोषण में रुकावट आ सकती है।
शुरुआत करने वालों के लिए घर पर बनने वाला सबसे आसान प्लांट फर्टिलाइज़र कौन सा है?
किसानो के लिए कम्पोस्ट तैयार करना या वर्मीकम्पोस्ट बनाना सबसे आसान विकल्पों में से हैं। ये मिट्टी को बेहतर बनाते हैं और कई तरह के न्यूट्रिएंट्स देते हैं और इसके लिए माली को अलग-अलग माइक्रोन्यूट्रिएंट सॉल्ट्स को नापने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
पौधों में माइक्रोन्यूट्रिएंट्स (सूक्ष्म पोषक तत्व) कैसे डालें?
फसल की ज़रूरतों और पोषक तत्वों की कमी के प्रकार के आधार पर माइक्रोन्यूट्रिएंट्स को मिट्टी में मिलाकर पत्तियों पर स्प्रे करके या फर्टिगेशन (सिंचाई के पानी के साथ खाद देना) के ज़रिए पौधों तक पहुँचाया जा सकता है। मिट्टी में डालने के तरीके में माइक्रोन्यूट्रिएंट फर्टिलाइज़र को मिट्टी में मिलाया जाता है या पौधों की जड़ों के पास डाला जाता है, जबकि पत्तियों पर स्प्रे करने के तरीके में पोषक तत्वों को पतले घोल के रूप में सीधे पत्तियों तक पहुँचाया जाता है।
फर्टिगेशन एक और असरदार तरीका है जिसमें पानी में घुलनशील माइक्रोन्यूट्रिएंट्स को सिंचाई प्रणाली के ज़रिए दिया जाता है, जिससे पोषक तत्व आसानी से जड़ों तक पहुँच जाते हैं। माइक्रोन्यूट्रिएंट्स डालने से पहले, पौधे की पोषक तत्वों की ज़रूरतों को समझना और बताई गई मात्रा का पालन करना ज़रूरी है, क्योंकि ज़्यादा मात्रा पौधों को नुकसान पहुँचा सकती है। सही माइक्रोन्यूट्रिएंट का सही मात्रा और सही विकास चरण में इस्तेमाल करने से पौधे की अच्छी बढ़त, बेहतर फूल आने और फसल की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद मिलती है।
निष्कर्ष
घर पर पौधों के लिए माइक्रोन्यूट्रिएंट्स बनाने का मतलब हमेशा बाल्टी में कई तरह के केमिकल्स मिलाना नहीं होता। ज़्यादातर घरेलू बागवानों के लिए बेहतर तरीका यह है कि अच्छी तरह तैयार कम्पोस्ट, वर्मीकम्पोस्ट, मल्च और सही ऑर्गेनिक मैटर का इस्तेमाल करके मिट्टी को उपजाऊ बनाया जाए।
जब किसी खास माइक्रोन्यूट्रिएंट की कमी का शक हो तो अंदाज़ा न लगाएं। जब मुमकिन हो मिट्टी की जांच करवाएं। पौधों में दिख रहे लक्षणों के दूसरे कारणों पर भी गौर करें और जब न्यूट्रिएंट की कमी को ठीक करने की ज़रूरत हो तो सही तरीके से बने फर्टिलाइज़र का इस्तेमाल करें।
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